मकर संक्रांति

Makar Sankranti (मकर संक्रांति) नन्हा पंछी बोला अपने माता पिता से,पहले अपने दाना खाने की ज़मीन ले ली। फिर ज़मीन के भाइयों को बेघर किया,अब इन जान लेवा मांजो से त्यौहार मना रहे है। अब बस माँ, बेरेहम जल्लाद बोहोत देख लिए।इंसानों से मिलने हम कब जा रहे है? सुना है इंसान बड़े समझदार होते … Read more

दिल ढूंढता है ।

दिल ढूंढता है । (The Heart Searches) दिल ढूंढ़ता है फिर वही, बचपन के दिन ! काश उन्हें लौटा दे मुझे, कोई अल्लादिन का जिन । जब सिर्फ भूख लगती थी, बेशुमार और बोहोत सारी !याद नहीं आता था किसी तरह का परहेज़ । ना रहती थी खुद को फिट रखने की ज़िम्मेदारी । खाओ-पीओ, खेलो, … Read more

जीना अभी बाकी है।

जीना अभी बाकी है। (There is still life left to live) आज जब पैर थक गए, गहरी सांस लेकर सोफ़े पर बैठ गई। खाना बना दिया, कपड़े धो दिए, और कुछ बाकी तो नहीं? सब काम कर लिए, रोज़ तो करते ही हैं। पर आज एक अजीब बेचैनी सी है। समझ नही आ रहा था … Read more

बेशरम भूख। (Shameless hunger)

बेशरम भूख। (Shameless Hunger) ये भूख भी बड़ी बेशरम है,जेब देखकर नहीं आती। इसे क्या पता, खर्चे पूरे करते करते,जेब मैं एक चवन्नी नहीं टिकती। गरीब इंसानों को ये ज्यादा है लगती। अमीरों के घर ये कुछ खास नहीं टिकती। पेट भर जात है इनका पैसों, ज़मीनों से ही। जितना भी मिले, इनकी भूख नहीं … Read more

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