चाँद को बक्श दो।

चाँद को बक्श दो। (Please Spare The Moon) इस धरती का किया है नुकसान हमने हर पल, हर दिन। जिसकी भरपाई है अब शायद नामुमकिन। पेट भरा अन्न से, सर पर दी छत, शरीर को ढका कपड़े से। उसी धरती को हम बर्बाद कर रहे है, राकेट की गति से। पर्यावरण को तबाह किए जा … Read more

बेशरम भूख। (Shameless hunger)

बेशरम भूख। (Shameless Hunger) ये भूख भी बड़ी बेशरम है,जेब देखकर नहीं आती। इसे क्या पता, खर्चे पूरे करते करते,जेब मैं एक चवन्नी नहीं टिकती। गरीब इंसानों को ये ज्यादा है लगती। अमीरों के घर ये कुछ खास नहीं टिकती। पेट भर जात है इनका पैसों, ज़मीनों से ही। जितना भी मिले, इनकी भूख नहीं … Read more

माँ आजकल चुप रहती है|(Mother Is Quiet Now A Days)

Mother Is Quiet Nowadays (Hindi Poem)बच्चे ने लिया जन्म , माँ की मिली उपाधि ,उसको पाल पोसकर बड़ा करने में ,माँ की ख्वाहिशें रह गई अधूरी और आधी | उनकी जरूरतें पूरा करने में वह खुद को गई भूल ,बिना चीजें हाजिर करने की हर जिद की कबूल | बच्चे हुए बड़े , लगे कमाने … Read more

Jaanwar Aur Insaan

जानवर और इंसान। (Animals And Humans) बचपन में दो जीवित प्राणियों का ज्ञान था, एक इंसान और दूसरा जानवर। इंसान सोच सकता है पर जानवर नहीं, लगता था सोच है मेरी यही सही। जैसे जैसे समझ आयी तब देखा, जानवर पेट भरने के लिए जिए, पर इंसान अपनी जीभ खुश करने के लिए।जानवर संतुष्ट हो, … Read more

Damaad (Our Son-In-Law)

Daamaad {दामाद} (Our Son-in-law) जब होती है बिदाई बेटी की,आँखों से होती है बरसात मोतियों की,देते है दुआएं माता पिता, घर तेरा सदा रहे आबाद,न जाने कैसा होगा हमारा दामाद। पराये घर मैं न कमी हो तुझे प्यार की,खुशियां सदा बरसती रहे यही करते है फरियाद,माँ बाप होते है यही सोचकर परेशान,न जाने कैसा होगा हमारा … Read more

Poem Compositions

🖋🖊 My Collection Of Poems Poems are a reflection of the writer’s mind. The poem is an ultimate outlet when happiness overflows or grief overshadows. An outlet for suppressed or unexpressed emotions. Poems are a boon to introverts. Speaking what goes on in the heart and brain becomes so easy. It is challenging for introverts … Read more

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