जीना अभी बाकी है।

जीना अभी बाकी है। (There is still life left to live)

आज जब पैर थक गए,
गहरी सांस लेकर सोफ़े पर बैठ गई।
खाना बना दिया, कपड़े धो दिए,
और कुछ बाकी तो नहीं?


सब काम कर लिए, रोज़ तो करते ही हैं।
पर आज एक अजीब बेचैनी सी है।
समझ नही आ रहा था वजह क्या थी।
कोई इशारा था, या बात कुछ और थी?

दिल ने तब एक हल्की सी आवाज़ लगाई।
ज़िंदगी के इस मुकाम पर, क्यूँ बार बार,
दस्तक दे रही है ये नन्हीं आवाज़ें।
न मन शांत है न ही मैं।
शायद अधूरी रह गई है कई बातें।

खुली खिड़की के दरवाजे कुछ इशारा कर रहे थे।

बाहर देखने के लिए मेरी आखों को जैसे ये उकसा रहे थे।
तब नजर आए कुछ उड़ते परिंदे बाहर मुझे।
एक पल में जैसे वो सारी ज़िंदगी जी रहे थे।
कभी इस डाल तो कभी उस डाल,
उनकी उड़ान ही बयान कर रही थी,
उनकी बेबाक, आज़ाद खुशी का हाल।

न कोई डर, न कोई फिक्र।
जी रहे थे वो पल कुछ इस तरह से,
मानो उनकी ज़िंदगी में कभी भी न रहा हो, गम का ज़िक्र।
एक चीज़ महसूस की मैंने तभी अचानक से।
बोहोत कुछ सीखना बाकी है अभी मुझे ज़िंदगी से।

परिंदे खा पीकर मस्त बैठे थे एक डाल पर।

उनको देखकर एक बात समझ में आ गई।
ज़िंदगी होती है उस पल में जीने के लिए।
गुज़रे कल को भूलकर, आनेवाले कल को प्रकृति पर छोड़ने के लिए।
न कल का अफसोस किए, न कल की चिंता किए।

उन्हें देखकर एक बात का एहसास हुआ आज,
गुनगुनाओ हर पल खुशियों का एक मधुर साज़।
जो है वो आज के लिए शायद काफ़ी है।
एक उम्र गुज़र गई और आज एहसास हुआ,
बिना सोचे वक़्त गुज़ारना बाकी है,
बिना डरे फैसले लेना बाकी है।

अब तक तो सिर्फ सांस ले रहे थे हम,
एक खुली, आज़ाद, बेफ़िक्र ज़िंदगी जीना बाकी है।
प्रकृति की गोदी में सर रखकर सोना अभी बाकी है।
अब तक एक एक साल गिनकर काट रहे थे हम।
ऊपरवाले की दी हुई ज़िंदगी को दोस्तों,
सही मायनों से जीना … अभी बाकी है।

– हेमा

सिनेमा प्रेमियों के लिए …

https://blogbyhema.com/the-golden-era-of-the-movies/





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