Jaanwar Aur Insaan

जानवर और इंसान। (Animals And Humans)

बचपन में दो जीवित प्राणियों का ज्ञान था,
एक इंसान और दूसरा जानवर।
इंसान सोच सकता है पर जानवर नहीं,
लगता था सोच है मेरी यही सही।

जैसे जैसे समझ आयी तब देखा,
जानवर पेट भरने के लिए जिए,
पर इंसान अपनी जीभ खुश करने के लिए।
जानवर संतुष्ट हो,
सर छुपाने के लिए थोड़ी सी जगह पाकर भी।
पर इंसान की भूख न मिटे दूसरों के सर से छत हटाकर भी।

जानवर किसी का उपकार, मदद सदा याद रखे।

पर इंसान वो है,
जो मदद करने वाले के बुरे वक़्त में,
उसका साथ छोड़ दे।

बारिश भी आजकल कहर की तरह है बरसती।
मानो इंसान को कुछ समझाना है चाहती।
इंसान नाम मिला है तो काम भी इन्सानों सा कर,
कुदरत से लेता है तो वापिस भी कर।
कुदरत से लेता है तो वापिस भी कर।

मोल चुका उस धरती का,

जो रौंदे जाने पर भी अनाज और फल है देती,
कर्ज उतार उस हवा का,
जो इंसान द्वारा प्रदूषित होने पर भी,
सांस लेने को प्राण वायु है देती।
स्वच्छ रख उन नदियों को,
जो जीवन समान जल है देती।
निगेबान बन जा उन पेड़ों का।
जो काटे जाने पर भी तुझे छाव, फल, फूल है देता।

आखिर में सौ बात की एक बात,
ये दिल है कहना चाहता।
नज़र उठा और देख उन दो जीवों को,
जो ले आये तुझे इस दुनिया में,
दुनिया तो उन्हें कहती है माँ और बाप,
पर है वो ईश्वर इंसान के रूप में।

न इनका कर्ज चुकेगा तुझसे,

न मोल चुकेगा तेरी दौलत से।
घमंड जिस पैसे का है तुझे आज,
वो दौलत न तेरे सर पर हाथ फेर है सकती,
न तेरे आंसू है पोछ सकती।
जानवर के सिर्फ दो गुण अपना कर देख,
जन्नत नसीब होगी तुझे इस धरती पर।
एक वफादारी, दूसरी निस्वार्थ भावना,
पते की बात है ये,
हो सके तो इसी जनम में समझ जाना।

– जानवर और इंसान। ( Animals And Humans ) – हेमा

https://blogbyhema.com/2022/04/18/we-humans-love-challenges/

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