दिवाली 2025

दिवाली 2025 (Diwali 2025)

कल परसो बाजार में भीड़ देख बड़ी हैरत हुई।
आस पास पूछा तो पता चला, दिवाली के दिनों की तो शुरुआत भी हो गयी।

मेरा अचंभित मन कह उठा, ये कैसे मुमकिन हो सकता है? 
कल ही तो बारिश की बूंदें कपडे गीले कर गयी थी, सावन तो अब भी ज़ारी है।

ए आई के ज़माने का असर है शायद, मौसम भी अब इंसान के दिमाग की तरह हो गया है।
क्या ट्रांजीशन करू, इसका भारी कन्फूज़न इसको तक हो रहा है।

खैर, छाते को संभालते हुए मैंने अपने कदम एक दूकान में रखे।
दुकानदार हंसकर बोला, छाता अक्टूबर की तपिश से बचने के लिए है, या इस बे मौसम बारिश के लिए?

हंसकर मैंने भी मज़ाक में एक बात कह दी,
मौसम भी गिरगिट जैसा हो गया है, इंसान की फितरत क्या कम थी? 

चलो कुछ खाने की चीज़ें तो दिखा दो,
दिवाली का स्वागत किया जाए, भले ही जिंदगी का दिवाला निकल चुका हो।

उसने एक प्लेट सामने रख दी दिवाली के खाने पीने के सामान से सजी।
मन तो ललचाया उनको देखके, पर सेहत ने रोक दिया, बड़ी मेहेरबानी उसकी।

चकली और शक्करपारे देखकर दाँत में लगे कैप याद आये।
पर सोचा ज़िन्दगी के अनुभव तो इनसे भी सख्त निकले, दाँत के साथ दिल को भी हिलाकर रखने वाले।

फिर मन किया कुछ नरम ट्राय करते है, जैसे गुलाब जामुन, बर्फी और गुजिये।
कुछ अनुभवों ने रोक लिया, इंसान जैसे कहीं ये भी तो नहीं? बाहर से मीठे पर अंदर से कड़वे।

मेरे मन की हलचल देख दुकानदार बोला, अजी खाने की चीज़ें बाद में ले लीजिये, आज कपड़े पसंद कीजिये।
पर मन तो कपड़े लेने का भी नहीं था, शायद वो पहली वाली ख़ुशी और जोश कहीं दूर पीछे ही रह गए।

वो ले गया मुझे पटाखों के अनुभाग में,
मुझे पसंद तो नहीं पर उसने कहा देख तो लीजिये।

उन पटाखों को देख कर सेहमे हुए जानवर, लाचार बुजुर्ग एवं मरीज़ों की याद आयी।
उस अनुभाग से मैं तेज़ी से बाहर निकल गयी।

क्या फायदा ऐसे त्यौहार का, जो सिर्फ किसी को परेशान और बेबस करता है।
ये तो बस कुछ खुदगर्ज़ और असंवेदनशील लोगों को ही खुश करता है।

फिर गए हम आख़री अनुभाग में, जहाँ थे आँख चुंधियाने वाले चमकते हुए कांदिल और रौशनी की मालाएं,
मैंने कहा ऐसी कोई लाइट है जिससे उदास मन जगमगा उठे और फिर जाग जाये आशाएं? 

दुकानदार समझदार था, बोला क्या मन नहीं है दिवाली मनाने का? 
मैंने मुस्कुराकर कहा, दिवाली पहले हुआ करती थी, रौशनी और मिठास से भरी हुई,
अब तो सिर्फ हर तरफ शोर और दिखावा है, टूटी हुई उम्मीदों और बेमतलब के रिश्तों का।




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